एमआइटी कॉलेज परिसर में बुधवार रात छात्रों द्वारा एंटी-रैगिंग सेल के कोआर्डिनेटर पर जानलेवा हमला किए जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह हमला बीते दिनों रैगिंग के आरोपित छात्रों के निलंबन और ऐसे घटनाओं की रोकथाम की सख्त कार्रवाई से बौखलाए कुछ छात्रों ने किया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमले के समय कोआर्डिनेटर अपने कार्यालय से बाहर निकले थे, तभी कुछ छात्रों ने उन पर हमला कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा बलों को सूचना दी। हमले में कोआर्डिनेटर गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।
एमआइटी प्रशासन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा कि रैगिंग जैसी घृणित घटनाओं को रोकना और एंटी-रैगिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। प्रशासन ने बताया कि हमले में शामिल छात्रों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।
कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों ने भी इस हमले की निंदा की है। कई छात्रों ने कहा कि यह घटना न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि पूरे कॉलेज समुदाय के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
पुलिस ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच के दौरान शामिल छात्रों को तत्काल हिरासत में लिया जा सकता है। अधिकारी यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि रैगिंग और हिंसा जैसी घटनाओं में संलिप्त किसी भी छात्र के खिलाफ शैक्षणिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉलेज परिसर में ऐसे हिंसक घटनाओं से न केवल सुरक्षा में खतरा बढ़ता है बल्कि शिक्षा के माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच संवाद बढ़ाने और एंटी-रैगिंग नियमों के पालन की दिशा में जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाए।
एमआईटी प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद सभी विभागों और छात्रों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है और भविष्य में ऐसे किसी भी हिंसक घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि रैगिंग और कॉलेज परिसर में हिंसा गंभीर समस्या है, और इसे रोकने के लिए शैक्षणिक संस्थाओं को सख्त नीतियों के साथ-साथ छात्रों के मानसिक और सामाजिक विकास पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
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